2021: A year of Love, Labour and Loss

Love is a mystery. Love is unitive. Love is how we connect as human beings with one another and with the whole universe together. Love is how we learn, become better, and make the world a better place to live for us and others. Love needs freedom to breathe, equality to thrive, and openness to flow and grow. Love is personal, political, philosophical, sexual, social, historical, metaphysical, transcendental, et al. Sadly, we have only one word to describe such a complex emotion. The ancient Greeks had six different words, but even that’s not enough. 2021 taught me new ways to describe the complexity of love and its various hues. Love lost on many counts, but it miraculously sprang on a few occasions like a phoenix. My LOVE vocabulary was defined and redefined by people who touched my life one way or another this year.

shillpi a singh

LOVE IS GRATITUDE: Ravi Sahani

… a feeling of thankful appreciation for the favors received from the Universe.

प्रिय दोस्तों
वो दिन हमारी ज़िंदगी के सबसे कठिन दिनों में से था। एक साथ घर के सात लोगों का बीमार हो जाना, बहुत ही कष्ट कारक और भयावह था। लेकिन हमलोगों ने मिलकर उसका मुक़ाबला किया, बिना डरे, पूरी हिम्मत के साथ। बीमारी के दरम्यान हमने कभी भी हिम्मत नहीं हारी, एक दूसरे के लिए हमेशा तैयार थे, किसी भी परिस्थिति से लड़ने के लिए।
उस वक़्त लहर अपनी चरम पर था, कभी टीवी देखने का मन होता तो, दो मिनट के अंदर ही उसे बंद कर देना पड़ता था, उस वक्त न्यूज़ चैनलों पर कुछ भी ऐसा नहीं दिखता था जो अंदर से आपको मजबूत करता हो उस बीमारी से लड़ने के लिए, जब भी टीवी चलाओ तो सिर्फ हाहाकार ही सुनाई देती थी, हमने दो महीने तक फिर दुबारा न्यूज़ चैनलों को देखा ही नहीं।
हमने तय किया था कि, हमलोग हॉस्पिटल नहीं जायेंगे, लगभग रोज़ डॉक्टर से ऑनलाइन बात होती थी और डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार हम अपनी दवाईयाँ लेते थे। मेरे घर में सबसे बाद में मुझे इंफेक्शन हुआ था और घर के सभी लोगों से ज़्यादा इंफेक्शन मुझे था, रोज़ दस इंजेक्शन लगते थे, लीवर और लंग बुरी तरह इंफेक्टेड थे, अच्छी बात यह थी कि मेरा ऑक्सीजन लेवल कभी भी बहुत कम नहीं हुआ। अपनी बीमारी के दरम्यान मैंने हमेशा अपनी हिम्मत को बनाये रखा, और घर के बाकी लोगों को भी ढाढ़स और हिम्मत देता रहता था।
पर एक बात थी जो मुझे बहुत चिंतित कर रही थी, वह थी बहुत ही ख़राब हो चुकी मेरी आर्थिक स्थिति, बैंक के पैसे तो कब के खत्म हो चुके थे, अब सारी दवाईयाँ क्रेडिट कार्ड से आ रहे थे, डॉक्टरों, कंपाउंडर और बाकि खर्चों का भुगतान भी क्रेडिट कार्ड से ही किया जा रहा था, पर दवाईयाँ और इंजेक्शन इतने महँगे थे कि मेरे कार्ड का क्रेडिट लिमिट भी बस 1-2 दिन में ख़त्म होने वाला था, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अब ख़र्च कैसे चलेगा। किसी से उधार माँगने में भी बहुत संकोच हो रहा था, क्योंकि लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार था।

LOVE IS GRATITUDE: Ravi Sahani

मैंने अपनी दोस्त को फ़ोन किया, हालचाल पूछा तो पता चला वह चारों लोग भी इंफेक्टेड हो गए थे, और उसके पति तो बहुत ज़्यादा बीमार थे और हॉस्पिटल में भर्ती थे, तसल्ली की बात थी कि नेगेटिव होने के बाद उस समय घर आ गए थे। दोनों बेटियाँ और ख़ुद मेरी दोस्त भी पहले से ठीक थी। मेरी दोस्त ने मेरे बारे में पूछा तुम कैसे हो, मैंने कहा ‘पॉजिटिव’ हूँ, फिर अपने और घर के बारे में बताया और अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में भी।
मेरी दोस्त से मैंने पूछा कि क्या ये संभव है कि क्राउड फंडिंग से मुझे बिना ब्याज के कुछ रुपये मिल सकते हैं जिसे मैं बाद में वापस कर सकूँ जब मेरे पास रुपये आ जाएँ, क्योंकि इलाज के लिए ख़र्च में अब दिक्कत आने लगी है ?
22 मई की शाम को हमारी यह बात हो रही थी, मेरी दोस्त ने कहा मैं देखती हूँ क्या हो सकता है, 23 मई की सुबह मेरी दोस्त का कॉल आया कि उसने अपने कुछ मित्रों से मेरे बारे में बात की है और उन्होंने मेरी सहायता के लिए ट्विटर पर पोस्ट डाला है, कुछ लोगों ने तुम्हारा एकाउंट डिटेल्स मांगा है, कुछ लोगों ने फण्ड रेजिंग प्लेटफार्म पर कैम्पेन बनाने की भी सलाह दी है।

फिर करीब दिन के एक बजे मेरी दोस्त का व्हाट्सएप पर मैसेज आया कि मैंने ketto पर तुम्हारा एक फण्ड रेजिंग कैम्पेन बना दिया है तुम देख लो। मेरी दोस्त ने मेरे लिए ढाई लाख रुपयों के लिए फण्ड रेजिंग कैम्पेन बनाया था, जब मैंने ketto पे लॉगिन किया तब तक लोगों ने कुछ रुपये भेज भी दिए थे, ट्विटर पर मेरे क्राउड फंडिंग को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने का जिम्मा मेरी दोस्त के अलावा जिन लोगों ने उठाया था उसमें सबसे आगे थे मयंक अग्रवाल और मेरे मित्र रितेश उत्तमचंदानी, रितेश तो मेरे पुराने मित्र हैं पर मयंक को मैं बिल्कुल नहीं जानता था, दरअसल मयंक मेरी दोस्त के मित्र हैं पर मयंक ने हमसे किसी जान पहचान के जो किया वह अपने आप में अद्भुत था। मेरा कैम्पेन दिन के एक बजे शुरू हुआ था और दिन के साढ़े तीन बजे तक कैम्पेन में डेढ़ लाख आ गए थे, लोगों का प्यार और सहयोग देखकर मुझे रोना आ रहा था। लोग ketto के अलावा मेरे एकाउंट में सीधे भी रुपये भेज रहे थे, मेरी दोस्त की दोस्त चित्रा सुब्रमण्यम जी ने तो ketto के अलावा मेरे एकाउंट में सीधे भी रुपये भेज दिए। मित्रों और शुभचिंतकों के प्यार की वजह से मेरे कैम्पेन में मात्र 11 घंटों के भीतर ढाई लाख एक सौ रुपये आ चुके थे, मैं हैरान था लोगों का प्यार और सहयोग देखकर, मुझे यक़ीन ही नहीं हो रहा था कि यह सब सिर्फ़ ग्यारह घंटे में हो गया है। यह सब संभव हो पाया क्योंकि अभी भी लोगों के अंदर दूसरों की मदद करने की भावनाएं जिंदा हैं, लोग अगर आर्थिक रूप से सक्षम हैं लोगों की मदद करने के लिए तो वह दिल से लोगों की मदद करते हैं चाहे वह उसको जानते हो या नहीं।

मैं यह बात इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मेरे डोनर्स में आधे से ज़्यादा ऐसे लोग थे जिनको मैं जानता भी नहीं था, ना तब और ना अब जान पाया हूँ क्योंकि उन लोगों ने बिना नाम बताए मेरी और मेरे परिवार की मदद की है, उन अनाम फरिश्तों को मेरा सलाम। बाकि जिनको मैं नाम से या व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ उनको तो मैंने व्यक्तिगत शुक्रिया और आभार प्रेषित किया है पर उन अंजान शुभचिंतकों को विशेष रूप से धन्यवाद कहना चाहता हूँ। मैं बहुत भाग्यशाली हूँ कि मुझे लोगों का इतना प्यार मिला, मैं अचंभित था कि सहयोग करने वालों में ऐसे लोग भी थे जिनसे मिले, बातें किए हुए 10 साल या उससे ज़्यादा भी हो गए थे, कुछ तो पुराने सहकर्मी थे, तो कुछ अपनी फोटोग्राफर और जॉर्नलिस्ट बिरादरी के मित्र थे, जिनसे मिले जमाना हो गया था, पर जब मेरी बीमारी के बारे में पता चला तो उन्होंने आगे बढ़ कर मेरा हौसला बढ़ाया और मेरी मदद की, उनके लिए कोई शब्द नहीं है मेरे पास, बस इतना कहना चाहता हूँ शुक्रिया दोस्तों आप सब ने मुझे तब भी याद रखा जब मैं ख़ुद को भुलाने लगा था। आप लोगों का प्यार मेरे लिए एक करिश्मे की तरह है।
शुक्रिया।
रवि

Gratitude is the memory of the heart.

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